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कुछ नया करें

क्रांति कहीं समस्त विवशताओं से उपजे

आक्रोश का विस्फोट तो नहीं

जब आगे का रास्ता नहीं सूझता

कोई ओर छोर नहीं बचता सहनशीलता का

सभी गलत होने का आरोप लगाते हैं

मजाक उड़ाते और ठठा कर ह॔सते हुए

उंगलियाँ उठा कर।

जिनलोगों पर विश्वास कर सौंप दिया था

अपना वर्तमान और भविष्य

वे ही आज मालिक बन बैठे हैं

कुछ भी देना अपनी कृप

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