कहते हैं कि सौ बार बोला गया झूठ

सच लगने लगता है।

इसका मतलब एक सच

सौ झूठ के बराबर होता है।

फिर भी बड़ी मेहनत से

झूठ पर झूठ बोला जाता है।

सच को पराजित करने का

भ्रम पाला जाता है।

राजनीति में वाक् चातुर्य का बोलबाला है।

लोग बातों को लपेटते जाते हैं

क्या कहना चाहते थे

कौन जान पाता है!

किसी को समझ में आए या न आए

अपने बाप का क्या जाता है।

सच कोसों दूर खड़ा नजर आता है।

ऐसे भाषा ज्ञान का निर॔तर प्रसार हो रहा है।

आम जन निर्वाक सब कुछ निहार रहा है।