हाथी झूमता चलता जाता है

कुत्ते भौंकते हैं, बकरे मिमियाते हैं

ब॔दर उछलकूद करते हैं।

हाथी को क्रोध भी आता है

कभी सूंड से लपेटकर दूर फेंक देता है

तब कई हड्डी पसली टूट जाती हैं

कभी अपना भारी पैर रख देता है

और काम तमाम हो जाता हैं

आवाजें फिर भी उठती हैं

लेकिन परवाह कौन करता है।

हाथी चलता जाता है ।

आसपास सब कुछ उजाड़ते हुए

खेत खलिहान, पेड़ पौधे, टीन टप्पर

राह में आने वाले हर अवरोध को

कुचलते,रौंदते,नष्ट करते हुए

हाथी झूमझूम कर चलता जाता है।

ताकत का नशा ऐसा ही होता है

लगने लगता है कि हालात ऐसे ही रहेंगे

कोई परिवर्तन कभी नहीं होगा ।

कहा जाता है कि परिवर्तन सृष्टि का

अमिट नियम है ।

एक दिन सब कुछ बदल जाएगा

न हाथी रहेगा न उसकी चाल

कोई शेर या कोई गधा

उस हाथी की जगह ले लेगा।