इश्क लगता है अब छलावा है

हर किसी बात के अलावा है

कितने अब भी हैं मुब्तिला देखो

वो नहीं जानते दिखावा है


वक़्त की वकत जानते ही नहीं

कोई भी बात मानते ही नहीं

हार जाएं तो ख़ुदकुशी कर लें

सोच लेते हैं बस बुलावा है