हम तो अब भी जब कहो गंगा बहा दें
उस वजह से इक समंदर पास होना चाहिए।
सुख या दुख हमने कभी बांटा नहीं परिवार का
फिर भला परिवार के क्यों पास होना चाहिए।
हादसों के बीच जीवन को गुजारे जा रहे हैं
किसलिए फिर मौत का डर पास होना चाहिए।


हम तो अब भी जब कहो गंगा बहा दें
उस वजह से इक समंदर पास होना चाहिए।
सुख या दुख हमने कभी बांटा नहीं परिवार का
फिर भला परिवार के क्यों पास होना चाहिए।
हादसों के बीच जीवन को गुजारे जा रहे हैं
किसलिए फिर मौत का डर पास होना चाहिए।