तुम मेरे घर के बाहर क्यों खड़े हुए हो

अपनी बात सुनाने पर क्यों अडे हुए हो

तुमको जिद है हमको भी अभिमान बहुत है

मेरी ताकत के आगे तुम गिरे- पड़े हो ।


कोई बात नहीं सुननी है हमें तुम्हारी

हम जो चाहेंगे उतना और वैसा होगा

कैसे मुंह दिखलाओगे औरों को अपना

हाल तुम्हारा यह सोचो तब कैसा होगा।


वापस जाओ वही करो जो करते आए

शायद खाकर तरस कृपा हम भी बरसाएं

हमसे टक्कर लेने की मत बात सोचना

इतना बल है हम में सबको धूल चटाएं।