अनाचार, कदाचार, भ्रष्टाचार

बढ़ रहे हैं देश में, समाज में

लोगों के मिजाज में।

बहुत फर्क आ चुका है

कल में और आज में।

कैसी ये हवा चली

मची हुई है खलबली

क्या करें इलाज में।

हर कोई तनाव में है

नेता बस चुनाव में है

जनता कराहती रही है लोकतंत्र राज में ।