कहो
चुप मत रहो
सहना
चुप रहना
कुछ न कहना
कायरता है
गुलामी है
हुजूर को सलामी है
इस जलालत में जीना
रोज अपमानित होना
कोई जिन्दगी है
ऐसी गलीज बन्दगी
तुमने अपने लिए
खुद चुनी है ।


कहो
चुप मत रहो
सहना
चुप रहना
कुछ न कहना
कायरता है
गुलामी है
हुजूर को सलामी है
इस जलालत में जीना
रोज अपमानित होना
कोई जिन्दगी है
ऐसी गलीज बन्दगी
तुमने अपने लिए
खुद चुनी है ।