कहो

चुप मत रहो

सहना

चुप रहना

कुछ न कहना

कायरता है

गुलामी है

हुजूर को सलामी है

इस जलालत में जीना

रोज अपमानित होना

कोई जिन्दगी है

ऐसी गलीज बन्दगी

तुमने अपने लिए

खुद चुनी है ।