'कबिरा खड़ा बजार में लिए लुकाठी हाथ'
लुकाठी की आग घर फूंकने के काम आती है। अग्नि का उल्लेख पौराणिक ग्रन्थों में मिलता है,बल्कि 'अग्नि पुराण' भी उपलब्ध है। अग्नि देवता भी हैं जिनका हाजमा दुरुस्त करने हेतु अर्जुन
को खांडव वन का दहन करने को कहा गया था।सागर की आग को बाड़वाग्नि और ज॔गल में लगनेवाली आग को दावाग्नि या दावानल कहते हैं।अपने प्रचंड रूप में आग धधकते ज्वालामुखी में देखी गई है जो अपने उदर से लावा के रूप में जलते कोयले,राख,पत्धर इत्यादि
उगलता रहता है।
तोप तम॔चा,गोला बारूद,मिसाइल,बम- सभी में आग की मौजूदगी होती है। यान वाहनों की गतिशीलता बहुत हद तक इसी पर निर्भर है। पेट की आग बुझानेवाला खाना आग पर ही पकाना पड़ता है।
आग में चिनगारियां होती हैं,शोले होते हैं ,लपटें होती हैं। कभी-कभी आग लगा
कर बस्तियां फूंक दी जाती हैं विभिन्न कारणों से। झुग्गी झोपड़ियों में आग लगना आम बात हो गई है।
फिलिस्तीन से हमास के लोग इजराइल की तरफ गुब्बारे उड़ा कर भेजते हैं जिनके फटने पर आग लग जाती है। बदले की कार्रवाई में इजराइल बम बरसा कर मकानों में आग लगा देता है। मतलब यह कि आग का उपयोग तरह-तरह से किया जाने लगा है।हवन,यज्ञ आदि में अग्नि को आहुतियां दी जाती हैं।
अग्नि का उपयोग अन्तिम संस्कार के लिए,विशेषतः हिन्दुओं में,किया जाता है। जब सती प्रथा प्रचलित थी उस समय चिता में पति के साथ पत्नी भी जीवित ही आग में जल जाती थी। आज भी डायन घोषित कर स्त्रियों को जला कर मार डालने की घटनाएं कभी-कभी प्रकाश में आती हैं।
जब से मानव ने आग जलाना सीखा तब से उसके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आ गया है। सुस्वादु भोजन का आनंद उसे प्राप्त होने लगा। आग का उपयोग करने के लिए माचिस,लाइटर इत्यादि का
आविष्कार हुआ ।दीपक जला कर अंधेरा दूर किया गया । मोमबत्तियां जला कर जन्मदिन मनाए जाने लगे।
अग्नि गाथा का समग्र वर्णन कर पाना स॔भव नहीं क्योंकि इसकी व्यापकता इतनी है कि कुछ न कुछ जाननेऔर बताने केलिए बचा रह जाएगा।


