आँखें

सब कुछ कहती है

सब कुछ जानती है

सब कुछ पहचानती है

जब गर्व हो तो , उठ जाती है

जब शर्म हों तो , झुक जाती है

जब दर्द हों तो, बह जाती है

जब सुख हों तो ,खिल जाती है

जब डर हों तो, फिर जाती है

जब क्रोध हों तो, जल जाती है

जब आश्चर्य हों तो ,फट जाती है

जब प्रेम हों तो ,मिल जाती है

आईना है आँखें

बिन बोले ही

सब कुछ कह जाती है

राज़ सबके दिल के खोल जाती है।