पहचान है मेरी जो मैं चुप रहती हूँ और आसमा से तारीफ करवाती हूँ आवाज सुरीली नहीं मगर गाती हूँ क्योंकि लोरियों से चाँद को सुलाती हूँ बड़ी सुंदर तो नहीं मगर चमकती हूँ और खूबसूरत विचारो मे झलकती हूँ पता है हार जाउगी फिर भी खेलती हूँ क्योंकि खुदपे बड़ा भरोसा करती हूँ नक्षत्रो सी तो नहीं मगर मैं स्वाती हूँ और तारीफ नही यही काम करती हूँ मेहनत से नहीं प्यार से करती हूँ क्योंकि काम मे ही ईश्वर देखती हूँ