तन्हा शहर मे हमने जिसे अपना समजा है
बंद आखो ने एक सपना जो साजा है
पाया हक़ीक़त मे तो वो एक पूजा है
देखते है उसमे ये कलम क्या लिखती है।।
हां वही टॉपर पूजा सावरकर है
आखे जिसकी मोतियो से बढ़कर है
और बाते संतवानीसे बढ़कर है
सही समजे संग साक्षी स्वातीके जो रहती है
देखते है उसमे.....।।
खुले आसमा का तारा हो कोई
सुन्दर नदीका किनारा हो कोई
कुदरत का बनाया नजारा हो कोई
हां हां सचमे इतनी सुन्दर जो दिखती है
देखते है उसमे.......।।
हमने हरपल उसकी चतुराई देखी है
निर्मल मनमे बसी अच्चाई देखी है
झुकी हुई नजरोमे अक्सर सच्चाई देखी है
बेमिसाल है खुद, हर बार कमाल जो करती है
देखते है उसमे....।।
सचमे हमने उसे अब तक ना समजा है
समजकर बस जितना समजे ये समजा है
दोस्त कई है मेरे उससा ना कोई दूजा है
जैसे पुजा ईश्वरकी वैसे जो लगती है
देखते है उसमे.....।।
जब जब साँसे डगमगाती है
कोई आफत मुसीबत आती है
तब पूजा उम्मीद की ज्योत जगाती है
अब समजा क्यों घर घर पूजा होती है
बस इतनाही मेरी कलम समझती है।।


