देश है बचाना
कभी अजान कभी गाय है बचाना
किसीको मस्जिद मंदिर है बनाना
टूट रहा है देश लेकिन इन गधोको
सिर्फ अपना मजहब है बचाना ।।
खुद के मजहब की रक्षा करना
ये तो धर्म है कर्म है अपना अपना
मुश्किल हो गया लेकिन इन मूर्दोको
मजहब के पहले देश है समजाना ||
क्या था कलाम आंबेडकर का सपना
देश कहा जा रहा वक़्त हो तो देखना
मेरे नही तो सही देखो उन दर्दोको
जिनकी मौत का आजादी था बहाना ||
बात बात मे अपनों से लड़ना झगड़ना
अच्छा नही तेरा युही टूटना बिखरना
नजर नहीं आ रहा आज अंधोको
तेरा मजहब है राजनैतिक खिलोना ||
सहा नही जाता अब यह नजराना
टूटे मकान देख भगवान का रोना
खुदा कैसे देखे ज़िंदा जलते बंदोको
बंद हो लढना शुरु हो देश बचाना ।।
ताकत पूरी लगाकर तुझे देश है बचाना
फिर मजहब को छुता कौन देखलेना
पहल करो बंद करो मजहबी धंदोको
जरूरी है इंसानियत को मजहब बनाना