ऐ चांद... मैं जानता हूँ, मेरे हर कदम पर नजर है तेरी, तू भले ही दूर हो, फिर भी मोहब्बत है मेरी, जानता हूँ तू पढ़ रही हैं मेरे हर शब्द, जो घुमा फिरा के तुझको सुनाता हूँ, तू दूर हैं मुझसे की तेरे पर इतने दाग़ हैं, मगर फिर भी तेरा हर पल साथ हैं !