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अनबन


अंधेरे रास्ते पर ख्वाहिशों का पुल बना कर,अपनी अंधूरी ज़िन्दगी का इंतकाम ले रहा।

पानी के बुलबुले पर चल रहा,आंखों की पुतलियों से कह रहा।

इतिहास के पन्ने पलट कर,वर्तमान की शिकायतअपने भविष्य से कर रहा।

— राहुल राय
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