वीर सिपाही आज नमन मैं करता हूँ इन माटी के वीरो को कर्तवय पथ के वीर है जो खुशियों की बस्ती मे हीर है जो ये खून नही ये आग है दिल मे माँ की रक्षा का राग है। सदैव बढ़ाया हाथ मदद का जहाँ भी गए पुकारे है चुन कर धरा पर आए ये सितारे है। यह भोले है पर शोले है मैदान मे बरसाते गोले है। यह सिर काटने मे शम्भू है घर बसाने मे यह तंबू है। दिल मे है आज़ादी का अरमान लिए पग-2 पर शांति का फरमान लिए यहाँ फुलझड़ी का कोई काम नही लगती है कतारे बम और तारो की यहाँ अंदाज़ अलग है होली का यहाँ खेल चलता है गोली का बितस्ता मे अंगार जगी है मिट्टी मे आग लगी है बहनो की राखिया सुनी कबसे है तुझको पुकारे दुबनी कबसे माँ के दिल मे मिलन की आस भाई की गले मिलने की प्यास है द्वेष भोग के मारे कई माँ के वीरो के हत्यारे कई बदहवास मद मे चूर पड़े है आग लगाते दूर खड़े धन्य है वह परमवीर सिपाही जिन्होंने वीरता की सर्वोत्तम उपाधि पायी करके जब टैंको को धराशायी जब अब्दुल ने दुश्मन से लोहा लिया दुश्मन भाग खड़े हुए और नाम वीर गति को प्राप्त हुआ। सहनशीलता की मे देता तुम्हारी दाद गुस्साये लोगो को करते काबू बिना किसी फसाद पर क्या समझेंगे वो गुटबाज पहनकर शहादत का ताज जब तुम सोते होंगे वो बिना भाई और बिना बेटे के कितने रोते होंगे आज़ादी की हिन्द फौज को व्यर्थ नही मरवाना है संभव हो यदि शांति वार्ता वहाँ लालच नही दिखाना है कुछ आये है कुछ और आएंगे कुछ ने किया है कुछ और कर जाएंगे पर यदि यही रही व्यवस्था तो कौन बितस्ता जाएगा यदि नारा तुम हिंदुस्तान मे हिंदुस्तान की हाय का लगाओगे ऐसे कुलषित वातावरण मे बोस कहाँ से लाओगे गाली देते तुम हो देश को इनका तो सम्मान करो गोली खाकर जय हिंद बोलते इनको तो चित मे ध्यान धरो है कांधा देते है शहादत को दुश्मन देश के जवानों की कौन सीज़ फायर तोड़ेगा इंसानियत इन परवानो की भारत माँ के ये वीर यहाँ सहते है हर पीर सदा आज धन्यवाद करता मैं तुमको इस मस्त मिली चिलचिलाहत के लिए मैं तुमको ध्यान धरता हूँ घरो के चिराग बचाने के लिए !!