ये क्या हुआ मुझे , मैं गहन चिंतन में पड़ गया।।क्या हुआ जो पेड़ से एक पत्ता झड़ गया ?और फूटेंगी नयी कोपले हर बसंत मेंभूलते चलो जो बिछड़ गया तो बिछड़ गया।।
ये क्या हुआ मुझे , मैं गहन चिंतन में पड़ गया।।क्या हुआ जो पेड़ से एक पत्ता झड़ गया ?
और फूटेंगी नयी कोपले हर बसंत मेंभूलते चलो जो बिछड़ गया तो बिछड़ गया।।