क्या जो मैं बोल ना सका
वो तुमने कभी सुनना भी चाहा था
क्या जो मैं जता ना सका तुमसे
वो तुमने महसूस करना भी चाहा था?
जो वक़्त गुजरा इंतज़ार में तुम्हारे
उसका तुमने कभी अंदाज़ा भी लगाया था
क्यों मैं साथ चल ना सका तेरे
उसका कभी कारण जानना भी चाहा था
क्यों पकड़ हाथ रोक नही लिया तुमने
क्या मैं इतना पराया था?
रोक कर देख तो लिया होता
क्या पता मैंने रुकना ही चाहा था
मुड़ कर पीछे देखना नही था तुम्हे
जब चल ही दिए थे तो
क्यों मुड़ कर एहसान जताया था
जो मैने तुम से कभी कहना चाहा
क्या वो तुमने सुनना भी चाहा था
