मत मिलाना शव-ए-राख हमारी मिट्टी में ,फसले इंकलाब चिल्लायंगी।मत बहाना अस्थियां हमारी नदियों में, सहलाब इंकलाब का लाएँगी।मत जलाना देह हमारी अग्नि में, चिता जवालामुखी बन जायेगी।मत छोड़ देना जिन्दा हंमे, वरना अंग्रेजी हुकूमत पछताएगी।
मत मिलाना शव-ए-राख हमारी मिट्टी में ,फसले इंकलाब चिल्लायंगी।मत बहाना अस्थियां हमारी नदियों में, सहलाब इंकलाब का लाएँगी।
मत जलाना देह हमारी अग्नि में, चिता जवालामुखी बन जायेगी।मत छोड़ देना जिन्दा हंमे, वरना अंग्रेजी हुकूमत पछताएगी।