पूछा गया हमसे महफिल में खड़ा करके
बताओ क्या चाहिए ! खुदा की तरफ इशारा करके
देना है तो दो बोलने की इजाजत
पर सावधान ! जुबान मेरी करती है बगावत
अभय है लब मेरे , बागी है कंठ मेरा
कठोर है वाणी मेरी, ज्वालामुखी है मुख मेरा
क्रांति है विचार मेरे, हलाहल है सच मेरा
तीखे विषेले शूल सा आहत ना कर दे ह्रदय तेरा
सोच है आजाद मेरी, आजाद है मुल्क मेरा
मैं तो उऋण हूं मुझ पर ना कोई शुल्क तेरा ।।
