हर लम्हा इम्तिहान की तरह है,

कोई सफल तो कोई असफल है,

हार कर बैठना मना है यहाँ ,

उठकर लड़ना हर चुनौतियों से है,

शायद, इसी का नाम ज़िन्दगी है (१)


हर लम्हा इम्तिहान की तरह है,

हर रिश्ते की अलग सी पहचान है,

कोई किसी को पाकर, तो कोई किसी से बिछड़कर खुश है,

भुलाकर टूटे रिश्ते नए रिश्ते तराशने है,

शायद, इसी का नाम ज़िन्दगी है (२)


हर लम्हा इम्तिहान की तरह है,

हर मोड़ पर एक नई चट्टान है,

टकराकर कर उससे अपना रास्ता बनना है,

खुद टूटकर कर ही हम लक्ष्य को पाते है,

शायद , इसी का नाम ज़िन्दगी है (३)


हर लम्हा इम्तिहान की तरह है,

हर सांस का ऋण चुकाना है,

हारकर भी जीत की उम्मीद जगाए रखना है ,

शायद, ईसी का नाम ज़िन्दगी है (४)