तुम्हारी ये साजिश मुझे focused रखने की मैं समझता हूँ, मानो जैसे तुम कोई quantum dot हो और मैंने तुममें entangled हूँI
वैसे मैंने समेट कर रखा है तुम्हारी हर एक सपनों को,
कि मानो UPSC का विद्यार्थी समेटता हो इतिहास के पन्नों को।
बता देता हूँ कि तुम्हें देने के लिए मेरे पास सिर्फ बसंत है,
पर क्या करूँ, तुम्हारी गलियाँ अब भी बेहद तंग हैं।
तुम्हें याद करूँ तो तुम्हारा गाँव मेरे नजदीक खिसक आता है,
अगर इसी तरह तुम याद आते रही तो ये सारा जहाँ एक गाँव भर रह जाता है
Heisenberg के theory से भी ज़्यादा uncertain
हमारा किस्सा है, मुझमें जो बाकी है पगली, वो तुम्हारा ही तो हिस्सा है!
- Rahul
