सुनो ना थोड़ा तुम मूस्कराओ
थोड़ा में मुस्कराऊ बात करें
गिले एक दूसरे के कुछ तुम भूलो
कुछ मे भी भूलूं औऱ माफ़ करें
कुछ यूं भी हो सुबह हो तुमसे
तुमसे हि दिन और रात करें
तुम भी कुछ काम अधूरे छोडो
मे भी कुछ काम अधूरे छोडूं औऱ मुलाकात करें
हसरत पूरी करलें औऱ पूरे हर जज्बात करें
सुनो ना थोड़ा तुम मूस्कराओ
थोड़ा में मुस्कराऊं बात करें
जब शाम की रूक्सत होने को हो
एक घाट किनारे बैठे हो हम
औऱ घाट के नीले पानी में, पाँव हमारे डूबे डूबे से हो
फ़िर कुछ में नीहारु तुमको ,कुछ तुम निहारो मुझको
और अपनी अपनी चाहत बयाँ आँखों के अल्फाज करें
ना तुम रेह पाओ मुझ बिन ,ना में रेह पाउं तुम बिन
चलो पैदा कुछ ऐसे हालात करें
सुनो ना थोड़ा तुम मूस्कराओ
थोड़ा में मुस्कराऊ बात करें