सूरज को भी आँख दिखा दे
जलधि में भी आग लगा दे
समर में जब पाँव जमाते
धरा नभ सब है थर्राते
देश की रक्षा हेतु ताक पर रख दी अपनी जान
ऐसे वीर सपूतों का आओ मिलकर करे गुणगान
तेजोमय मुख ज्वलंत लोचन
पग उठाये तो लाये प्रभंजन
भुजंग सी है सबल भुजाएँ
कीर्ति गाती चहू और दिशाए
उनके अदम्य साहस का संपूर्ण जगत करे सम्मान
ऐसे वीर सपूतों का आओ मिलकर करे गुणगान
क्या वैसाखी और क्या होली
घर से दूर मनी हर दीवाली
हम यहाँ उत्सव पर्व मनाते
क्योकि वो सीमा पर गोली खाते
हमारे लिए कर गए अपनी खुशियां दान
ऐसे वीर सपूतों का आओ मिलकर करे गुणगान
अंतिम सांस तक फ़र्ज़ निभाते
बिन मुंड सैनिक भी लड़ते जाते
तूफानों में गिरते पड़ते
विपदाओं से लड़ते लड़ते
जो पुण्यवेदी पर चढ़ कर करे अपना सर्वस्व बलिदान
ऐसे वीर सपूतों का आओ मिलकर करे गुणगान
सूली पर चढ़ी जिनकी जवानी
ना भूलो उनकी कुर्बानी
जीवन जिनका है प्रेरणा स्त्रोत
जलती रहे सदा ये अमर ज्योत
भारतवर्ष को रोशन कर बुझ गए वो दीप दीप्तिमान
ऐसे वीर सपूतों का आओ मिलकर करे गुणगान


