मैने गंगा के अंदर निर्मल तट पर लाशो जलते देखा है
वायु भूमि और जल में मिलकर मानव को गलते देखा है
अग्नि ताप से खंडित होकर पंचतत्व में मिलते देखा है
सुख दुःख चिंता मोह सभी को शुन्य में घुलते देखा है
मैने गंगा के अंदर निर्मल तट पर लाशो को जलते देखा है
WRITER RAHUL MISHRA


