जब ये दुनिया खत्म हो रही होगी
लोप का भाव तब सृजन पर भारी होगा
सबका हास हो रहा होगा
पैसा आजादी इच्छाएं अच्छाईयां
पर कुछ चीज जो हमेशा रहेगी
वो होगी तुम्हारी अना
तुम्हारी सुंदरता जो अमर है
मेरे शब्दों में
मेरी आकांक्षा जो अंत तक रहेगी
दबी हुई सी
हृदय की धमनियों में
और वो हास्य विनोद
जो तुमसे करता रहा
अपने अकेलेपन में
तुमको पास महसूस करके
क्या इस सबका कभी
खात्मा हो सकता है
मेरे इस भौतिक शरीर के साथ
क्या विचार अमर नहीं?
जो स्वछंद विचरण करते है
ब्रह्माण्ड में,
पर फिर भी
अगर मानो सब कुछ चला ही जाए
सब नष्ट हो ही जाए
तो पुनः जन्म लेगी
कोई नई सभ्यता
हमसे ज्यादा कुलीन
व्यवस्थित और संवेदनशील
पर वो भी बनेगी किसी
त्रासदी का भोग
क्योंकि उसके पास भी
रहेगा ये पेट
और उसकी
भूख...!!!
- राहुल लखेड़ा


