Poetry 1 min read 787.8K reads

JANAMDIN


सालभर के हिसाब की बारी हैजीवन के बही खातों की नई शुरुआत की तैयारी हे

कल तक के हिसाब रख दिए यादों की तिजोरी में भरकरआज से जीवन के नए खातों में हिसाब करने की तैयारी हे

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