तुम कहती थी कि समय के साथ सब ठीक हो जाता है,
फिर भी क्यो, आज भी मुझे तुम्हारे ही ख्याल क्यो आते है,
फिर भी क्यो, आज भी मुझे तुम्हारे आवाज़ क्यो सुनाई देती है,
फिर भी न जाने क्यों हर-पल, हर-लम्हा तेरा मेरे पास,
मेरे करीब होने का एहसास दिलाता है,
माना तुम कहती हो कि हम अब साथ नही हो सकते,
फिर भी न जाने क्यों हर वक़्त हर लम्हा तुम्हें पाने की चाह रहती है,
न जाने क्यों हर मन्दिर, मस्जिद, दरग़ाह के सामने अपनी फरियाद कर देते है,
सुना है ऐसा की 24 घंटे में 1 लम्हा ऐसा भी आता है,
जब आपकी कही हुई बात सच हो जाती है,
शायद.. शायद उसी एक लम्हे को सच करने के लिए हर वक़्त बस तेरा ही मन में ख्याल लाते है,
दिन हो या रात, सुबह हो या शाम हर वक़्त बस तेरे संग ही परिणय-सूत्र में बंधने के बारे में सपने आते है,
चलो एक बार फिर से,
तुम मेरी और मैं तुम्हारा ज़िन्दगी भर के लिए बन जाते है।


