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तुम मेरी, मैं तुम्हारा...

तुम कहती थी कि समय के साथ सब ठीक हो जाता है,

फिर भी क्यो, आज भी मुझे तुम्हारे ही ख्याल क्यो आते है,

फिर भी क्यो, आज भी मुझे तुम्हारे आवाज़ क्यो सुनाई देती है,

फिर भी न जाने क्यों हर-पल, हर-लम्हा तेरा मेरे पास, 

मेरे करीब होने का एहसास दिलाता है,

माना तुम कहती हो कि हम अब साथ नही हो सकते,

फिर भी न जाने क्यों हर वक़्त हर लम्हा तुम्हें पाने की चाह रहती है,

न जाने क्यों हर मन्दिर, मस्

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