हर शाम लौटताएक नए आशियाने परमैं उड़ता पंछी नहींचलता जमीन पर इंसान हूं
हर शाम लौटताएक नए आशियाने पर
मैं उड़ता पंछी नहींचलता जमीन पर इंसान हूं