मैं विचार हूँ

मुख़ातिब रहूँगा

दरवाजों के खुलते ही 

रौशनी सा आऊंगा l


तुम पर्दों के

ओट में छुपे रहनाl

मैं वक़्त-बे-वक़्त

दरवाज़े खटखटाउंगा l


सोए रहना तुम

गहन निद्रा में

घटनाओं के सक्ल में

मैं याद दिलाऊंगा l


तुम ख़ुद में सिमटे

अहंकार में रहना

मैं किसी बेतक्लुफ्फ

बेशर्म सा फिर भी आऊंगा l


~राहुल बरियारपुरी