
शुबह से शाम तक
सफ़र कर के ,
सूरज भी सो गया है
थक कर के l
फिर स आग़ जलाने का
आरज़ू लेके,
शीतल हुआ आशमा जो
जल रहा था धू धू करके l
फिर से तपिश में
झुलसाने के लि
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शुबह से शाम तक
सफ़र कर के ,
सूरज भी सो गया है
थक कर के l
फिर स आग़ जलाने का
आरज़ू लेके,
शीतल हुआ आशमा जो
जल रहा था धू धू करके l
फिर से तपिश में
झुलसाने के लि