वक़्त लम्हा लम्हा बहता
चल रहा है .
चलते चले है बहते
मैं और तू
मखमली मंजर में
सुनहरी ख्वाबो कि
जिंदा आरज़ू
मैं और तू
तेरी महकती खुश्बू से
महकी है फिज़ा
हवा में बिखरते
मैं और तू
तेरे नाम से धड़कता दिल
मिन्नतें करता
झरने से टूट के सवरते
मैं और तू ...
कोई अधूरे ख़्याल में सुलझे
उलझें जाते है
हाथों कि अंगुलियों सी
मैं और तू .
~राहुल बरियारपुरी
@RahulBriyarpuri


