साड़ी की अलग कहानी है
क्यूँ ये ना-मर्दी की निशानी है?
क्या ये कमज़ोरी का होना है
क्यूँ ये शर्मिन्दगी का होना है?
साड़ी में नारी खेत-खलियान जोते
मजदूर होकर घर-बार जोते
लानत तुमने खुद पर लायी है
क्या चोट स्त्रीत्व पर ना लगाई है?
गर साड़ी शर्म की निशानी है
तो क्यों 'अर्जुन' ने डाली है
ना बड़े हो तुम ना वो भगवान बड़ा
ना पैसा बड़ा ना प्रधान बड़ा
भगवान जन्मे जिस नारी ने
ये उस नारी की निशानी है
साड़ी की अलग कहानी है,
ओ रामचन्द्र पूजने वालों
'रामचन्द्र मांझी' को भी तुम जानो
कुछ अतीत को पहचानो
कुछ 'आज' को भी तुम जानो
द्वापद नहीं ये आज का ज़माना है
सोचो, गर नया 'भारत' बनाना है
क्या याद तुम्हे झांसी की रानी है
साड़ी की अलग कहानी है..
- राहुल अभुआ 'ज़फर' (09-02-2021) ✒️


