संघर्षों में भी खुश रहता हूँ 

मैं नर्क में रहता हूँ 


ये घोसला है ऐसा 

जिसमे ऐश-ओ-आराम तो नहीं 

महलों सी नक्काशियाँ नहीं

लंका सी रंगीनियाँ नहीं 

संपन्न हो जाये जिसमे चित्त

ऐसी शांति में रहता हूँ 

मैं नर्क में रहता हूँ


ये झोपड़ा है ऐसा

जिसमे खून किसी का बहा नहीं 

सपने किसी के मरे नहीं 

हत्या किसी की हुई नहीं

चीखे किसी की दबा सकें 

ऐसी चार-दिवारी से डरता हूँ 

मैं नर्क में रहता हूँ

- राहुल अभुआ 'ज़फर'