कहानी – बाउजी बेल्ट वाला
ज्वालाहेड़ी मेन-मार्केट, एक ऐसी जगह जहाँ बहुत कम में कपडे मिल सकते हैं। भीड़भाड़ भरी इस मार्किट में एक रोड पर ही 'मुन्ना उर्फ बाऊजी' फेरी लगाता है, बाउजी (मुन्ना) बेल्ट बेचता है।
वो होते हैं न जो मार्किट की छोटी-छोटी गालियां में खड़े सामान बेचते हैं, बाउजी (मुन्ना) भी यही काम करता है। वो गले में 15-20 बेल्ट डालकर और हाथो में कुछ बेल्ट लिए हर आने जाने वाले को बेल्ट बेचने की कोशिश करता है।
मुन्ना का नाम बाउजी क्यों पड़ा इसके पीछे भी वजह है, मार्किट के सभी लोग उसे बाउजी कहके ही बुलाते हैं क्यूंकि पेट पालने के लिए धंधा बहुत ज़रूरी है, और धन्धा बिना मक्खन लगाये नहीं होता, आप ये समझ लीजिए की वो किसी आईआईएम (IIM) या बिज़नेस स्कूल नहीं गया लेकिन उसको अच्छे से मालूम है की सामने वाले को मीठा बनकर माल कैसे बेचा जा सकता है, और इंसानी फितरत भी तो यही है मीठा बनकर आँखें नम करके आप सौ झूठ कह दीजिये सामने वाला आपका मुरीद हो जायेगा, नहीं नहीं नेताओ का इससे कुछ लेना देना नहीं, हाँ नेता बनने की पूरी खूबी है मुन्ना उर्फ बाउजी में, मुन्ना अपने हर ग्राहक को बाउजी कहकर सम्भोदित करता है और उसका ये हथकण्डा हमेशा कारगर सिद्ध होता आया है इसीलिए मार्किट के लोग उसे मुन्ना कम बाउजी ज़्यादा बुलाते है।
खैर, बाउजी (मुन्ना) आज भी बेल्ट बेचने में लगा हुआ है तभी एक अधेड़ उम्र का आदमी उसके पास आता है, इसका नाम घनश्याम है, घनश्याम को तलाश है कुछ अलग ही चीज़ की, वो थोड़ा परेशान भी दिख रहा है।
बाउजी (मुन्ना) भांप जाता है और घनश्याम को रोकते हुए कहता है -
'बाउजी इधर आइये, ये देखिये बाउजी एक से बढ़कर एक बेल्ट है, सलमान शाहरुख़ आमिर रणवीर सब स्टाइल की बेल्ट, आप डिज़ाइन दिखाओ वैसी बेल्ट लाके दुँगा और प्राइस की गारेंटी है बाउजी पूरी मार्किट में मुझसे बढ़िया माल और दाम किसी का नहीं होगा'
घनश्याम - ये कितने की दी ? नहीं रेक्सीन है ये तो
घनश्याम ये कहते हुए चलने ही वाला होता है की तभी बाउजी (मुन्ना) उसको रोकता है
'आपको लैदर चाहिए न प्योर लेदर? अरे बाउजी बताओ तो आप, ऐसा लैदर दूँगा की आप भी याद रखोगे'
घनश्याम ने जवाब दिया - 'रेक्सीन दिखा के लैदर बोल रहा है?'
बाउजी (मुन्ना) - अरे बाउजी सबको लैदर ही दे दूँगा तो अपना धन्धा कैसे चलेगा, आप जैसे पारखी नज़र वाले कम ही लोग आते हैं, ओरिजिनल लैदर की बेल्ट बेचूंगा तो 3-4 साल तक तो ग्राहक आएगा नहीं, और ये गाय आंदोलन जबसे हुआ लैदर का ओरिजिनल इम्पोर्ट ही बंद हो गया है, आप तो पढ़े लिखे लगते हो जानते ही होगे'
घनश्याम बाउजी (मुन्ना) की बाते सुनके जैसे खुश सा हो गया था, ये बाउजी (मुन्ना) की टेक्निक है जिसमे वो माहिर है। बाउजी (मुन्ना) घनश्याम को अंदर अपनी दूकान की तरफ चलने को कहता है, घनश्याम उसके पीछे हो लेता है और वो दोनों संकरी गलियों से होते हुए एक छोटी सी दुकान तक पहुँचते हैं, ये छोटा सा खोखा बाउजी (मुन्ना) ने किराए पर लिया हुआ है जहाँ वो अपना माल रखता है।
'आओ बाउजी, अब बताओ आपको किस डिज़ाइन में दिखाऊ बेल्ट?' - बाउजी (मुन्ना) ने घनश्याम से पूछा,
'कोई भी चलेगी यार' - घनश्याम ने अपनी पैंट सम्भालते हुए बाउजी (मुन्ना) को जवाब दिया,
बाउजी (मुन्ना) - अरे आपकी पैंट ढ़ीली है क्या, मतलब आपको रेगुलर यूज के लिए चाहिए
घनश्याम - हाँ, तू दिखा, ऐसी दिखाइयो जो टूटे नहीं, प्योर लैदर होना चहिये
बाउजी (मुन्ना) को कुछ खटका और उसने घनश्याम से सवाल किया
'आपको किस यूज के लिए चाहिए बाउजी?'
घनश्याम - देख, बच्चों को सुधारने के लिए कल एक बेल्ट टूट गयी, आज निकला हूँ वोही ढूँढ़ने
जैसे ही बाउजी (मुन्ना) ने ये बात सुनी उसने पलट कर 2 डिब्बे निकाले और अलग-अलग तरह की बेल्ट घनश्याम के सामने रख दी, सब चमक रहीं थी और महक रही थी लैदर की मेहक से,
बाउजी (मुन्ना) - ये देखो बाउजी, ये है माल आपके टाइप का, मेरे बहुत रेगुलर ग्राहक हैं जो इसी काम के लिए मुझसे बेल्ट ले जाते हैं। ये वाली देखो, ये बेल्ट है जब आपका बच्चा बोले की वो कॉलेज ख़त्म करके अपना पैशन फॉलो करना चाहता है, इसकी लगायी मार उसके दिमाग पे लगेगी और बच्चा भूल जायेगा पैशन-वेशन सब
बाउजी (मुन्ना) ने एक चमकदार बेल्ट दिखाते हुए घनश्याम से बोला,
बाउजी (मुन्ना) - और ये देखो बाउजी, ये वाली है अगर आपका बच्चा कहे की उसको भांड, एक्टर, क्रिकेटर या देश सेवा करनी है तो, इसकी मार ऐसी लगेगी की फर्स्ट अटेम्प्ट में रेलवे हो या यू.पी.एस.सी (UPSC), बैंकिंग हो या एस.एस.सी (SSC) सब फर्स्ट अटेम्प्ट में क्लियर
घनश्याम एक-एक कर सब बेल्ट देख रहा है और वो एक बेल्ट की जगह 2 बेल्ट ऊठाता है और पैक करने को कहता है
ओरिजिनल लैदर है न? - घनश्याम ने पूछा,
बाउजी (मुन्ना) - बाउजी आपको तो सब मालूम है लैदर के बारे में आपसे क्या छुपाना, 4 साल की तो मेरी गारंटी है बाउजी, आप याद रखोगे मुझे, और हाँ मिठाई खिलाते जाना जब भी बच्चे का करियर बन जाये तो बाउजी...
घनश्याम ने उससे हाथ मिलया और वो निकल गया वहां से।
बाउजी (मुन्ना) ने उसको जाते हुए देखा, वहां दीवार पर टंगे आईने में खुदको देखते हुए याद किया की किस तरह बचपन में उसके पिता ने उसके सपनों को दबा अपनी इच्छाएँ थोपीं , मुन्ना हमेशा से एक बॅडमिंटन खिलाडी बनना चाहता था लेकिन उसके सपनों पर जितनी बेल्ट चलायी गयी उसने उसकी ज़िन्दगी को उजाड़ कर रख दिया।
अपने प्रतिबिम्ब से बाहर आते हुए उसने वहां पड़ी सब बेल्ट उठायी और अपने काँधे पर डाली और फिर निकल गया फुटपाथ की तरफ बेचने के लिये।
- राहुल अभुआ 'ज़फर'


