"हिन्दी"

बचपन में जब गौर से देखता था

इस शब्द को तो

न जाने क्यों

"माँ" की अनुभूति होती थी मुझे

जैसे माँ 'श्रृंगार' के नाम पर

बस एक 'बिंदी' लगा लिया करती है

बिलकुल उसी तरह की

भाषा का श्रृंगार 'हिंदी' है

- © राहुल अभुआ (10-01-2021)