दूर रह कर न करो बात, क़रीब आ जाओ
याद रह जाएगी ये रात, क़रीब आ जाओ
कबसे बैठे हैं, तेरी दीद में, हम बरसो से
करलो इक और मुलाक़ात, क़रीब आ जाओ
मय तडपती है, मचलते हैं, अब अरमां मेरे
रश्क कर बैठे ना ये जाम, क़रीब आ जाओ
चाँद निकला है, चमकते हैं सितारे यूँ भी
इस घडी मेरी है क़ायनात, करीब आ जाओ
दूर रह कर न करो बात, क़रीब आ जाओ
याद रह जाएगी ये रात, क़रीब आ जाओ...
- © राहुल अभुआ 'ज़फर'
Dedicated and humble tribute to Sahir Ludhiyanvi Sahab and Sangeet Samraat Muhammed Rafi Sahab by me.


