'बीज'

मैं एक 'बीज' हूँ 

एक ऐसा 'बीज' 

जिसे अपने अंदर छिपे 'अंकुर' का ज्ञात है

जन्म से ही एक 'बीज' घिरा होता है 'खोल' से 

समय के साथ उस 'खोल' को टूट जाना होता है

मै वो 'खोल' छोड़ चुका हूँ 

सभी को छोड़ देना चाहिये, 

अगर नहीं छोड़ा तो 

'अंकुर' नहीं फूटेगा

अगर तुमने वो 'खोल' नहीं छोडा

तो वो 'खोल' मिटा देगा तुम्हे..

- © राहुल अभुआ 'ज़फर' ✒️ (25-01-2021)