तुम पर ग़ज़ल कहूँ आओ हम मिलते हैं

तुम चुप रहो और मैं लिखता रहूँ आओ हम मिलते हैं


दफ़्तर में यूँ बदनाम हो गया मैं

अकेला मुस्कुरा रहा था जब हम मिलते हैं

आओ हम मिलते हैं

- राहुल अभुआ 'ज़फर'