2 जुगनू (कहानी) -

बहुत निराशा थी दोनों में, रात के तकरीबन 3 बज रहे थे उसकी नींद खुल गयी, वो बाहर गया और ड्राइंग रूम में बैठा कुछ पेंट करने लगा, प्रेक्षा की भी नींद खुल गयी थी, वो बाहर आयी और उसको केनवस पर कुछ पेंट करते देखती रही, नज़रें मिलीं, दोनों ने बजाये वापस बैडरूम में जाने के काफी देर यहाँ-वहां की बातें करी और डार्क-कॉफ़ी शेयर करते हुए मद्धम रौशनी में खिलखिलाते रहे, मन की सब थकान मानो छूमंतर हो चली थी..

ऐसा ही होता है जब 2 'सही लोग' एक रिश्ते में बंधते हैं अन्यथा व्यर्थ है सब..


बस इतनी सी थी ये कहानी..


- राहुल अभुआ 'ज़फर' (10-03-2021)