एक दिन जहाज में जाने का सफर मिल गया,

मानो बहुप्रतीक्षित मौके का अवसर मिल गया |

मन ही मन में फूला नहीं समा रहा था,

हर आते जाते को किस्सा बता रहा था |

दो घंटे पहले पहुंचना पड़ गया,पहचान पत्र दिखाना पड़ गया |

चेक इन काउंटर पर अजब मसला हो गया,

कुछ समझ नहीं आये गज़ब झमेला हो गया |क्या बताएं सामान को हमसे जुदा कर दिया गया, 

दे के टिकट हाथ में किसी लम्बी सी पटरी पे पटक दिया गया |

हुई मन में घबराहट फिर तनिक सोचा,

बड़ी अचकचाहट के बाद उन महिला से पूछा |महोदया मुझको जाना है जहाज से,

सामान भेज दिया आपने रेल यातायात से |

तुच्छ दृष्टि से देखते हुए कहा ऐसा कुछ नहीं होगा,

ना घबराएं आपका सामान आपके जहाज में ही होगा |

उसके बाद सुरक्षा वालों ने कुछ यूँ टटोल मारा,

हुई गुदगुदी छूटा हंसी का फब्बारा |

उसके बाद घुस गए हम जहाज के अंदर,

बड़ी प्रसन्नता हुई, हुआ जोर का अभिनन्दन |सीना फूल उठा, हुआ गर्व अपनेआप पे,

जैसे मानो हम बहुत ही खासमखास हैं |

विनम्रतापूर्वक कुर्सी तक ले जाया गया,

पर तभी हमें पेटी से बांधा गया |

रहा नहीं गया कहा अब ये क्या बला है,

वो बोलीं श्रीमान इसमें आप ही का भला है |

नियमों के अनुसार ये आपके लिए जरूरी है,

बांधे रखेगी आपको और करती सुरक्षा पूरी है |

फिर अचानक जहाज चालक ने गति यूँ बढ़ाई,बहुत जोर का शोर हुआ बड़ी तेज आवाज आयी |

उड़ने लगा जहाज गगन में,कंपन होने लगा बदन में |

मन अनायास डरने सा लगा,

प्रभु का नाम जपने लगा |

विनती करूँ में बारम्बार,

मुझको देदो बाहर उतार |

गलती हो गयी अब कभी नहीं आऊँगा,

गाड़ी मिले ना मिले पैदल ही चला जाऊँगा |