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अम्मा, तुम ऐसी क्यों हो?

अम्मा, तुम ऐसी क्यों हो? 

तुम, खुद जैसी क्यों हो?


अपनी परवाह न करती हो, 

हम सबकी परवाह में मरती हो.


तुम खुद खाओ खाना या ना,

पर सबकी फ़िक्र में रहती हो.      


हम देर रात घर भी आएं, 

तुम जागी ही मिलती हो.


अम्मा, तुम ऐसी क्यों हो? 

तुम, खुद जैसी क्यों हो?


सुबह, दोपहर, शाम, रात, 

सब एक किये रहती हो.        


हम भले हार-थक जाएँ, 

पर तुम न कभी थकती हो.


अम्मा, तुम ऐसी क्यों हो? 

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