याद आती रही याद जाती रही
वेवजह रात भर वो जगाती रही
गीत लिखने जो बैठा तुम्हारे लिये
दर्द मय शब्द वो खोज लाती रही
अनकहे शब्द देकर जगाती रही
पास उनके मुझे रोज लाती रही
जब छुपा चाँदनी में बदन ये मेरा
वो अंधेरी घटा बनके छाती रही
याद आती रही याद जाती रही
गीत वो ज़िन्दगी के सुनाती रही
मोन नयनों की भाषा बताती रही
दर्द के गीत हँसकर सुनाती रही
तन से तन का मिलन ये जरूरी नही
रूह का मेल हर पल कराती रही
याद आती रही याद जाती रही
बादलों सा मुझे वो रुलाती रही
गीत बनकर मुझे गुनगुनाती रही
दीप बनकर मुझे वो जलाती रही
होके लक्ष्मण सी तुम दूर मुझसे हुई
उर्मिला याद मुझको बनाती रही
याद आती रही याद जाती रही
प्रेम के दीप उर में सजाती रही
मौन लब्जो से हमको पढ़ाती रही
प्रीत का व्यकरण ये सिखाती रही
मैं गजल बन गया गीत में ढल गया
शब्द लाकर ये मुझको सजाती रही
याद आती रही याद जाती रही
प्यार करना मुझे ये सिखाती रही