हाथों में अगणित पुष्पों की माला लेकर आना तुम खुशियों की चौखट पर आके मंद मंद मुसकान तुम मेरी प्यारी प्राण दुलारी सपनो की अधिकारी सुन जैसी नई साल आती है वैसे ही आ जाना तुम   सपनों में छूकर के तन को , चंदन सा कर जाना तुम केशो को बिखरा कर प्यारी खुशियों को महकाना तुम मनभावन मेरी प्रेमलता सुन अंतर्मन की ज्ञान अर्चना जैसे नई साल आती है वैसे ही आ जाना तुम   सरसों जैसी ओढ़ चुनरियां मेरा मन बहकाना तुम पीले पीले पुष्पों के संग आँगन मेरा सजाना तुम कोहरे से ढकती नभ में है स्वर्ण आभा तू मेरी सुन जैसे नया साल आता है वैसे ही आ जाना तुम     मेरे अंतर्मन में साथी नन्हा दीप जलाना तुम होंठो से कुछ गीत सुरीले मिलन राग में गाना तुम कलरव करती अंतर्मन में व्याकुल भाव बेचारी सुन जैसे नया साल आता है वैसे ही आ जाना तुम   डाल गले मे जयमाला मुझको हर्षित कर जाना तुम नई सुबह बनकर जीवन में नव उमंग ले आना तुम तेरे स्वागत में नैन लगाये मेरी राधा रानी सुन जैसे नई साल आती है वैसे ही  आ जाना तुम