
हाथों में अगणित पुष्पों की माला लेकर आना तुम
खुशियों की चौखट पर आके मंद मंद मुसकान तुम
मेरी प्यारी प्राण दुलारी सपनो की अधिकारी सुन
जैसी नई साल आती है वैसे ही आ जाना तुम
सपनों में छूकर के तन को ,
चंदन सा कर जाना तुम
केशो को बिखरा कर प्यारी खुशियों को महकाना तुम
मनभावन मेरी प्रेमलता सुन अंतर्मन की ज्ञान अर्चना
जैसे नई साल आती है वैसे ही आ जाना तुम
सरसों जैसी ओढ़ चुनरियां मेरा मन बहकाना तुम
पीले पीले पुष्पों के संग आँगन मेरा सजाना तुम
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