जज़्बात और देशभक्ति's image
Poetry2 min read

जज़्बात और देशभक्ति

radheshyamjatiya5radheshyamjatiya5 November 3, 2022
Share0 Bookmarks 57590 Reads1 Likes
*हुआ कुछ यूं* 

हुआ कुछ यूँ के हम चल तो पड़े सफर पर,
मगर मंजिल फरेबी थी ये ठिकाना बदलती रही
 वो पिस्तौल सी आँखें' जिन्हें मासूम जाना था.. 
वो हर एक गोली पर अपना निशाना बदलती रही

शमा जलती थी जलती है और जलती रहेगी भी, 
बस शम्मा तो शम्मा है ये परवाना बदलती रही।

किसी के खातिर मुझसे ज्यादा खुद को कौन बदलेगा?
 उसने जब- जब भी चाहा मुझको मनमाना बदलती रही।

ए माँ मिल जाये मुझको तुजसा कोई चाहने वाला
 भूखी रहकर भी मेरी फरमाइशों पर खाना बदलती रही

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts