सफर इतना तो कर लिया है मैंने कि,

किसी की जिंदगी का ज्यादा नहीं

बस थोड़ा सा हिस्सा हूं मैं,

किसी के गम में पिघल जाती हूं

तो कभी खुशी में घुल जाती हूं

मीठा बोलती हूं ना कड़वा बस

अपनी खामोशी से बहुत कुछ

बयां कर जाती हूं..