कोई चेहरा मिला धड़कनो में खिला

फ़ूल बनके बहारो की गलियां मिली

चांद की चांदनी सी है उसकी चमक 

सखी देखो अमावस की रात छटी

उससे मिलकर जीवन में खुशी मिलगई............

मायूस रहता था मै बेचैन होता था मै 

जो उसकी नजरो को देखूं शनम

जैसे कोई मुझे हम सफर मिल गया

थी निगाहे बड़ी उसकी शरारत भरी

होठ थे जैसे फुलों की फुलझड़ी

बातें करें वो नाजुक सी बड़ी.....................

आया ऐसा सफर जिसका था न खबर

कर गये हम बड़ी नादानी खबर

आ गई मुझमे बहके जलन की निशानी

जिससे रूठ चली रंजन सोना चली 

रूठ गऐ अरमा की गली वो नाजुक कली..............

ये है अजब सी कहानी ओ साथी मेरे

जो प्रेम की थी वो निशानी मेरे

जिसकी याद बनी कुर्वानी जिस्म

कोई चेहरा मिला धड़कनो में खिला

फ़ूल बनके बहारो की गलियां मिली.........