मोहब्बत की जो तुमसे मैं जमाना देख जलता है
वक्त ये क्या बताएगा जब हम ही नहीं होगें यहां
जवाने की ये उल्फत ने मिटा डाला मोहब्बत को
दो अंगुल के हिस्से को यहां इज्जत समझते हैं
करो कितनी इनायत पर जवाना देख के जलता है
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मोहब्बत की जो तुमसे मैं जमाना देख जलता है
वक्त ये क्या बताएगा जब हम ही नहीं होगें यहां
जवाने की ये उल्फत ने मिटा डाला मोहब्बत को
दो अंगुल के हिस्से को यहां इज्जत समझते हैं
करो कितनी इनायत पर जवाना देख के जलता है
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