आ जाओ हे मेरे घर आँगन की रानी

बस जाओ दिल मे लेकर याद पुरानी

गीत सुनाओ प्रीत लगाओ ,

संघ मुझको भी उड़ना सिखलाओ |

बच्चे-बछड़े,बूढ़ी अम्मा, गाय-भैंस और दादा-बाबा

इन सबकी तुम प्यारी गौरैया,

डाल-डाल और पात-पात पर 

उछल-कूदकर तुम इनका मन बहलाओ |

भूंख लगे तो चुन लो दाना,प्यास लगे तो पीलो पानी

पर मेरे घर-आँगन से रूठ न जाना

ऐ मेरी मोहब्बत तुम साथ निभाना |

मैने बनाये घर मे ताखे-झरोखे अनेक

मैने लगाये है बैर-बबूल के पेड़ अनेक

तुम्हारे रहने का किये हम जतन अनेक.|

आ जाओ याद तुम्हारी आती है,

जब तुम फुदक-फुदक कर नन्हे कीड़ों को खाती हो

आइने में खुद को देख लड़ती और झगड़ती हो |

कितना अच्छा लगता था ,

जब तुम संघ चुन-चुन भोजन करती थी |

    I Love my Sparrow