किसका सिकवा करूं और किसका गिला करूं  

छोड़ वो मुझको गये प्यार सिखाने वाले

कसूर उनका नही, कसूर तो मेरा ही था

जो अर्थ के चक्कर मे,उनका घर उजाड़ बैठे